परिचय
स्थापना और उद्देश्य
"अंतर्राष्ट्रीय जिझौतिया ब्राह्मण महासंघ" की स्थापना संवत 2078 (ईस्वी सन् 2021) में हुई थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत और विदेशों में रहने वाले जिझौतिया ब्राह्मण परिवारों को एक सूत्र में एकजूट करना और संसदीय कार्यप्रणाली के अनुसार इसका संचालन करना है।
गतिविधियाँ और लक्ष्य
- एक विधान, एक धर्मध्वज गान और एक धर्मध्वज के नीचे सभी जिझौतिया समुदाय को एकजुट करना।
- सदस्यों को सदस्यता अभियान और केंद्रीय डेटाबेस में योगदान हेतु प्रेरित करना।
- सकारात्मक सामाजिक उत्थान और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना।
प्रमुख घटनाक्रम
एक अंतर्राष्ट्रीय महासंघ महाअधिवेशन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2024 को भोपाल में आयोजित किया जाएगा। सभी परिवारों को आमंत्रण भेजा गया है।
संगठनात्मक संरचना
महासंघ की संरचना में केंद्रीय समिति, राज्य अध्यक्ष और सलाहकार समिति शामिल हैं। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, उपमहामंत्री और महामंडलेश्वर जैसे पद होते हैं।
जिझौतिया धर्मध्वज और उसका प्रतीकात्मक महत्व
जिझौतिया धर्मध्वज केसरिया रंग का है, जो वैदिक संस्कृति, वीरता, ज्ञान और बलिदान का प्रतीक है। इस पर ॐ, त्रिशूल, अग्नि और वेद अंकित हैं, जो धर्म, शक्ति और यज्ञ की भावना को दर्शाते हैं।
- ॐ: परमेश्वर और शाश्वत सत्य का प्रतीक।
- त्रिशूल: ब्रह्मा, विष्णु, महेश की शक्ति और बुराई पर विजय का प्रतीक।
- अग्नि: यज्ञ की पवित्र अग्नि और अर्पण का प्रतीक।
- वेद: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद यज्ञ पीठ पर स्थित हैं।
- ध्वज गान: वैदिक ऋषियों की ज्वाला और शिवशक्ति का त्रिशूल समाहित है। यह त्याग और शुचिता का प्रतीक है।